September 13, 2026 4:40 am

आरटीआई से नहीं मिल सकेगी हर निजी जानकारी! हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, जानिए कब नहीं देना होगा जवाब

बिलासपुर : हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की सीमा और व्यक्तिगत निजता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति से जुड़ी निजी जानकारी जैसे विवाह पंजीयन आवेदन, जन्मतिथि पहचान पत्र या अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज, सामान्य परिस्थितियों में किसी तीसरे पक्ष को आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराए जा सकते। केवल तब ही ऐसी जानकारी दी जा सकती है, जब उससे जुड़ा कोई व्यापक जनहित स्पष्ट रूप से सामने आता हो।दोनों याचिकाएं अदालत ने की खारिज न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकल पीठ ने इस आधार पर दायर दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके साथ नागरिकों की निजता की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।क्या था पूरा मामला अंबिकापुर निवासी डीके सोनी ने आरटीआई के जरिए सूरजपुर जिले के विशेष विवाह अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत विवाह पंजीयन आवेदन, उससे जुड़े दस्तावेज आदेश और सार्वजनिक सूचना की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि आवेदक तीसरा पक्ष है और मांगी गई जानकारी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी होने के साथ व्यक्तिगत प्रकृति की है। बाद में राज्य सूचना आयोग ने भी अधिकारियों के फैसले को सही मानते हुए द्वितीय अपील खारिज कर दी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।निजता की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीयन से जुड़े दस्तावेजों में नाम, पता जन्मतिथि फोटो और पहचान पत्र जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी होती है। यदि आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि जानकारी सार्वजनिक हित में जरूरी है जैसे भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग का खुलासा करना तो ऐसी जानकारी उपलब्ध कराना व्यक्ति की निजता का अनावश्यक उल्लंघन होगा।आरटीआई और निजता के बीच संतुलन जरूरी अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार नागरिकों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, लेकिन इसका उपयोग किसी व्यक्ति की निजी जानकारी हासिल करने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। इसलिए व्यक्तिगत सूचना से जुड़े मामलों में आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत निजता की रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

INA
Author: INA

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