October 30, 2026 8:12 pm

खोंगापानी में वन भूमि पर अवैध कब्जे का कथित खेल! जंगल की जमीन पर बन रहे मकान, वन विभाग मौन

  • सालों से धीरे-धीरे सिमट रहा जंगल, आखिर वन विभाग और प्रशासन कब जागेंगे?

खोंगापानी (एमसीबी)।

खोंगापानी नगर पंचायत क्षेत्र में वन भूमि पर कथित अवैध कब्जा कर मकान बनाए जाने का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर वर्षों से जंगल की जमीन पर धीरे-धीरे निर्माण होने की बात सामने आ रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में जंगल की जमीन पर मकानों का विस्तार होता जाएगा और वन क्षेत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग को इस स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है?

रेंजर को फोन, लेकिन फोन उठाने की जहमत तक नहीं!

मामले को लेकर जब संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने फोन नहीं उठाया। ऐसे में वन भूमि पर हो रहे कथित अतिक्रमण को लेकर विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जंगल की जमीन पर कब्जे और पेड़ों की कटाई जैसे गंभीर विषयों पर भी वन विभाग की ओर से अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।

आज एक मकान, कल पूरी जमीन पर कब्जे का खतरा!

स्थानीय स्तर पर वर्षों से जंगल की जमीन पर मकानों के निर्माण और वन क्षेत्र के धीरे-धीरे सिमटने की चिंता जताई जा रही है। यदि इन निर्माणों की वैधानिक स्थिति की जांच नहीं हुई और अतिक्रमण पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में वन भूमि पर कब्जे की समस्या और गंभीर हो सकती है।

वन भूमि केवल खाली पड़ी जमीन नहीं है। यह पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों को नजरअंदाज करना पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।

वन विभाग और सरकार से सीधे सवाल

  • क्या खोंगापानी क्षेत्र में वन भूमि की सीमाओं का विधिवत सीमांकन किया गया है?
  • वन भूमि पर बने पुराने मकानों और नए निर्माणों की जांच कब होगी?
  • कथित अतिक्रमणों के संबंध में अब तक कितनी शिकायतें मिलीं और क्या कार्रवाई की गई?
  • क्या संबंधित क्षेत्र का स्थल निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया जाएगा?
  • यदि वन भूमि पर अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कौन करेगा?
  • क्या जिला प्रशासन और वरिष्ठ वन अधिकारी इस मामले में जवाबदेही तय करेंगे?

अब कार्रवाई होगी या जंगल उजड़ने का इंतजार?

खोंगापानी में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला केवल कुछ मकानों के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह वन संरक्षण, सरकारी जमीन की सुरक्षा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा विषय है।

अब जरूरत है कि वरिष्ठ वन अधिकारी, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करें, वन भूमि का सीमांकन कराएं तथा निर्माणों की वैधानिक स्थिति की जांच करें। यदि अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या खोंगापानी की वन भूमि को अतिक्रमण से बचाया जाएगा, या फिर धीरे-धीरे खत्म होते जंगल को देखकर जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे रहेंगे?

INA
Author: INA

विज्ञापन