बीबीसी लाइव | मनेन्द्रगढ़
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल के वनमंडलाधिकारी (DFO) मनीष कश्यप पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि एक आईएफएस अधिकारी होने के बावजूद वे आरटीआई कानून का पालन नहीं कर रहे हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था बल्कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नियमों और प्रशासनिक आचरण के भी विपरीत माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मनेन्द्रगढ़ वन मंडल से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को लेकर आम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा समय-सीमा के भीतर आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन तय 30 दिनों की अवधि बीत जाने के बावजूद न तो पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई गई और न ही किसी प्रकार का विधिसम्मत जवाब दिया गया।
RTI कानून की मंशा पर सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि विभाग का शीर्ष अधिकारी ही इस कानून की अनदेखी करता है, तो इससे निचले स्तर के अधिकारियों को भी गलत संदेश जाता है। जानकारों का कहना है कि एक आईएफएस अधिकारी से कानून के पालन की अपेक्षा आम नागरिकों की तुलना में कहीं अधिक होती है।
संघ लोक सेवा के नियमों के विपरीत?
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, UPSC से चयनित अधिकारियों के लिए संविधान, कानून और नागरिक अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य होता है। आरटीआई जैसे महत्वपूर्ण कानून की अवहेलना सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आ सकती है।
शिकायत की तैयारी में आवेदक
RTI आवेदकों का कहना है कि यदि शीघ्र सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो वे राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायत दर्ज कराएंगे। साथ ही, पूरे मामले की जानकारी उच्च वन विभागीय अधिकारियों और मंत्रालय तक पहुंचाने की भी तैयारी की जा रही है।
वन विभाग की चुप्पी
इस पूरे मामले में मनेन्द्रगढ़ वन मंडल कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब देखना यह होगा कि सूचना अधिकार अधिनियम की कथित अनदेखी पर उच्च अधिकारी और राज्य सूचना आयोग क्या संज्ञान लेते हैं, और क्या आम नागरिकों को उनका संवैधानिक अधिकार समय पर मिल पाएगा या नहीं।






















