March 16, 2026 3:59 am

RTI से कांपा वन विभाग! मनेंद्रगढ़ में रेंजर–DFO ने क्यों छुपाई CAMPA मजदूरों की लिस्ट?

अब्दुल सलाम क़ादरी। मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़)
मनेंद्रगढ़ वन मंडल में पारदर्शिता के दावे एक बार फिर कागजों में ही दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी ने वन विभाग के रेंजर और DFO की भूमिका को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

RTI आई तो विभाग में मची खलबली

CAMPA मद 2024–25 के अंतर्गत कराए गए कार्यों में लगे मजदूरों की सूची, वाउचर और भुगतान विवरण मांगे गए थे।
लेकिन जानकारी देने के बजाय विभाग ने चुप्पी, टालमटोल और बहानेबाज़ी का रास्ता अपनाया।

सूचना देने की जगह ‘सूचना छुपाने’ की कवायद

RTI की समय-सीमा खत्म हो गई, फिर भी पूरी जानकारी नहीं दी गई।
मजबूर होकर आवेदक ने प्रथम अपील दायर की — लेकिन वहां भी रेंजर और DFO स्तर पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

‘व्यक्तिगत जानकारी’ का ढाल, भ्रष्टाचार की दीवार?

सबसे बड़ा सवाल तब उठा जब वन विभाग ने मजदूरों की जानकारी को RTI की धारा 8(1)(j) का हवाला देकर “व्यक्तिगत सूचना” बता दिया।
जबकि हकीकत यह है कि सरकारी पैसे से भुगतान पाने वाले मजदूरों की जानकारी जनता का अधिकार होती है।

???? तो सवाल उठता है—

  • आखिर मजदूरों की सूची सार्वजनिक करने में डर क्यों?
  • क्या फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान हुआ?
  • क्या कागजों और जमीन पर काम करने वालों की संख्या अलग-अलग है?

DFO और रेंजर की भूमिका पर गंभीर सवाल

दस्तावेज़ साफ इशारा करते हैं कि DFO और संबंधित रेंजर ने पारदर्शिता दिखाने के बजाय सूचना को लॉक करने का काम किया।
जब जवाब साफ हो सकता था, तो उसे छुपाने की जरूरत क्यों पड़ी?

प्रथम अपील भी बनी दिखावा?

अपील की सुनवाई में आवेदक की अनुपस्थिति दिखाकर मामला निपटा दिया गया, जबकि विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
क्या यह निष्पक्ष सुनवाई थी या विभाग को बचाने की औपचारिकता?

वन विभाग की छवि पर गहरा दाग

जिस विभाग का काम जंगल, मजदूर और सरकारी धन की रक्षा करना है, वही विभाग आज
???? सूचना छुपाने
???? सवालों से बचने
???? RTI को कमजोर करने
के आरोपों में घिरता नजर आ रहा है।

अब मामला जाएगा आगे

सूत्रों की मानें तो मामला अब

  • राज्य सूचना आयोग
  • और आवश्यकता पड़ने पर
  • न्यायालय तक
    ले जाने की तैयारी है।

अगर सब कुछ ईमानदार था,
तो RTI से इतना डर क्यों?

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