- PCCF ने कह दी जांच की बात, पर सवाल—क्या घोटालेबाजों से ही होगी जांच?
मनेन्द्रगढ़ | विशेष रिपोर्ट। अब्दुल सलाम क़ादरी
मनेन्द्रगढ़ वन मंडल इन दिनों कथित भ्रष्टाचार, अघोषित ठेकेदारी और घटिया निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोपों के घेरे में है। स्थानीय नालों पर बनाए जा रहे बेसमेंट स्टॉप डेम की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अघोषित ठेकेदारों के माध्यम से, रेंजर की भूमिका में काम कराए जा रहे हैं, और सरकारी नियमों को ताक पर रखकर जनता की गाढ़ी कमाई से मिलने वाले टैक्स का दुरुपयोग किया जा रहा है।

बिना सूचना बोर्ड, नियमों की खुली अनदेखी
नियमानुसार किसी भी सरकारी निर्माण स्थल पर कार्य का नाम, योजना, स्वीकृत राशि, अवधि और जिम्मेदार अधिकारी का विवरण दर्शाने वाला सूचना बोर्ड अनिवार्य होता है।
लेकिन जिन स्थानों पर स्टॉप डेम का निर्माण हो रहा है, वहां ना तो कोई बोर्ड लगा है, ना कार्य का नाम और ना ही लागत की जानकारी, जिससे पूरे निर्माण को लेकर संदेह और गहरा गया है।
बिना छड़ के बेसमेंट स्टॉप डेम, पहली बारिश में ढहने का खतरा
स्थानीय ग्रामीणों और तकनीकी जानकारों के अनुसार, स्टॉप डेम के बेसमेंट में सरिया (Reinforcement Steel) का उपयोग नहीं किया जा रहा, जो सीधे तौर पर तकनीकी मानकों का उल्लंघन है।

स्टॉप डेम गुणवत्ता का तकनीकी रेशियो
एक गुणवत्ता पूर्ण RCC स्टॉप डेम में सामान्यतः—
- सीमेंट : रेत : गिट्टी = 1 : 2 : 4
- स्टील (छड़) = 80 से 120 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर RCC
- उचित फाउंडेशन गहराई और
- कम से कम 14 दिन की क्योरिंग आवश्यक होती है
आरोप है कि मनेन्द्रगढ़ में बन रहे स्टॉप डेम में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे ऐसे ढांचे पहली तेज बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
अघोषित ठेकेदारी और फर्जी मजदूरी भुगतान का आरोप
जानकारी के अनुसार—
- कार्य अघोषित ठेकेदारों से कराया जा रहा है
- काम ठेकेदार और उनके निजी लेबर कर रहे हैं
- लेकिन मजदूरी भुगतान कागजों में फर्जी नामों से दिखाया जा रहा है, कई मामलों में ठेकेदारों और उनके लेबरों के नाम पर ही मजदूरी घोषित की जा रही है
यह पूरा मामला सरकारी धन की बंदरबांट और फर्जी बिलिंग की ओर इशारा करता है।
रमेश सिंह नामक ठेकेदार की भूमिका पर सवाल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि रमेश सिंह नामक व्यक्ति द्वारा वन विभाग के कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन—
- उनके ठेके की कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं
- यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे अधिकृत ठेकेदार हैं या नहीं
डीएफओ और रेंजर की भूमिका पर उठे सवाल
इन तमाम आरोपों के बीच डीएफओ मनीष कश्यप और मनेन्द्रगढ़ रेंजर रामसागर कुर्रे की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है तो—
- सूचना बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
- तकनीकी गुणवत्ता मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ?
- मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता क्यों नहीं है?
PCCF द्वारा का जांच का भरोसा, पर संदेह बरकरार
मामले को लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) श्रीनिवास राव से फोन पर संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान उन्होंने पूरे मामले की जांच का भरोसा दिया।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या जांच निष्पक्ष होगी, या फिर जिन पर आरोप हैं उन्हीं से जांच कराकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
“जंगल में मोर नाच रहा है…”
स्थानीय लोगों की जुबानी कहावत इस पूरे मामले को बयां करती है—
“जंगल में मोर नाच रहा है और देखने वाला कोई नहीं।”
आरोप है कि कमीशनखोरी के खेल में जनता के टैक्स के पैसों से घटिया निर्माण कराया जा रहा है, और राजनीतिक संरक्षण के चलते जिम्मेदार अधिकारी निश्चिंत नजर आ रहे हैं।
अब नजर जांच पर
अब सबकी निगाहें PCCF द्वारा दिए गए जांच के आश्वासन पर टिकी हैं।
यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मनेन्द्रगढ़ वन मंडल का यह मामला आने वाले समय में वन विभाग के बड़े घोटालों में शामिल हो सकता है।






















