March 16, 2026 7:46 am

हसदेव क्षेत्र में SECL की सड़क निर्माण में बड़ा खेल! राजनगर स्टेडियम–पालकीमाड़ा माइंस बीसीम रोड पर घटिया डामरीकरण, ठेकेदार–secl अधिकारियों की मिलीभगत उजागर?

खोंगापानी। राजनगर

अब्दुल सलाम क़ादरी-एडिटर इन चीफ

हसदेव क्षेत्र में SECL के अंतर्गत आने वाली राजनगर स्टेडियम होते हुए पालकीमाड़ा माइंस (बीसीम रोड) पर हो रहे डामर सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मौके पर चल रहे कार्य में मानकों की खुली अनदेखी सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है।

स्थानीय निरीक्षण और उपलब्ध वीडियो फुटेज के अनुसार सड़क निर्माण में

  • डामर (बिटुमेन) की मात्रा बेहद कम रखी जा रही है,
  • पुरानी जर्जर सड़क को उखाड़े बिना उसी पर ऊपर-ऊपर डामरीकरण किया जा रहा है,
  • और सबसे गंभीर बात यह कि इमल्शन/टैक कोट (Emulsion/Tack Coat) का उपयोग तक नहीं किया जा रहा, जो कि डामरीकरण की बुनियादी तकनीकी शर्त है।

तकनीकी मानकों की खुली अवहेलना

सड़क निर्माण के भारतीय मानक (IRC/MoRTH गाइडलाइंस) के अनुसार—

  • पुरानी सड़क पर डामर बिछाने से पहले सतह की सफाई,
  • टैक कोट/इमल्शन का छिड़काव ताकि नई परत का पुरानी सतह से उचित बंधन हो,
  • निर्धारित बिटुमेन कंटेंट और
  • तय मोटाई (Thickness) में लेयर बिछाना अनिवार्य होता है।

लेकिन यहां इन सभी मानकों को ताक पर रख दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना इमल्शन और कम डामर के किया गया डामरीकरण 1–2 साल या उससे भी कम समय में उखड़ जाता है, और सड़क फिर से अपनी पुरानी जर्जर हालत में लौट आती है।

भुगतान रोकने की मांग, विजिलेंस को शिकायत

इस पूरे मामले को लेकर SECL विजिलेंस विभाग को पत्र और वीडियो फुटेज के साथ औपचारिक शिकायत भेजी गई है, जिसमें

  • संबंधित ठेकेदार का पूरा भुगतान तत्काल रोकने,
  • कार्य की तकनीकी जांच,
  • और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

हसदेव एरिया सिविल डिपार्टमेंट सवालो के कटघरे में

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हसदेव एरिया का सिविल डिपार्टमेंट आखिर क्या कर रहा है?

  • क्या बिना साइट निरीक्षण के बिल पास किए जा रहे हैं?
  • क्या जानबूझकर घटिया कार्य पर आंखें मूंदी जा रही हैं?

अगर यही हाल रहा तो यह सड़क जनता और खदान से जुड़े श्रमिकों के लिए खतरा बन जाएगी और करोड़ों रुपये का काम कुछ ही समय में बेकार साबित होगा।

अब देखना यह है कि SECL प्रबंधन और विजिलेंस विभाग इस गंभीर शिकायत पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबा दिया जाएगा।

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