अब्दुल सलाम क़ादरी-
देश में महंगाई पर सियासत गर्म है, लेकिन बाजार ठंडा नहीं पड़ रहा। 2014 से 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि आम आदमी की थाली धीरे-धीरे ‘डाइट प्लान’ पर चली गई है—बिना उसकी मर्जी के।
2014 में जब नई उम्मीदों का दौर शुरू हुआ, तब—
- पेट्रोल करीब ₹70 प्रति लीटर के आसपास था,
- रसोई गैस सिलेंडर ₹400-450 में मिल जाता था,
- दाल ₹70-80 किलो,
- और सरसों तेल ₹90-100 लीटर।
अब 2026 आते-आते—
- पेट्रोल कई शहरों में ₹100-110+ प्रति लीटर,
- गैस सिलेंडर ₹900-1100,
- दाल ₹120-160 किलो,
- सरसों तेल ₹140-180 लीटर तक पहुंच गया।
यानि, विकास की रफ्तार इतनी तेज रही कि दाम भी पीछे नहीं रहे—सीधे साथ दौड़ पड़े!
विश्लेषण:
सरकार कहती है—महंगाई “कंट्रोल” में है।
जनता कहती है—“हां, इतना कंट्रोल है कि खर्च करने से पहले ही जेब खुद को रोक लेती है।”
2014 में आदमी बाजार जाता था खरीदारी करने,
2026 में वही आदमी बाजार जाता है—“सिर्फ देखने और सोचने कि अगली सैलरी कब आएगी!”
एक बुजुर्ग बोले—“पहले सब्जी वाला पूछता था ‘क्या चाहिए?’, अब हम पूछते हैं ‘क्या सस्ता है?’”
एक युवा ने कहा—“अब तो पेट्रोल डलवाते वक्त ऐसा लगता है जैसे EMI भर रहे हों!”
कुल मिलाकर, 2014 से 2026 तक देश ने विकास जरूर देखा…
बस फर्क इतना है कि ग्राफ ऊपर गया—और आम आदमी नीचे दबता चला गया।
“आंकड़े चढ़े ऊपर… और जनता रह गई नीचे!”






















