March 16, 2026 2:13 am

यूपी-बिहार वालों को ‘गाली’ देना पड़ा महंगा, ठाकरे ब्रदर्स को घर में मिली मात, मराठी भी सारे नहीं आए साथ

INA news

देश सबका है… ऐसा लगता है क‍ि यह बात मुंबई के लोगों ने ठाकरे ब्रदर्स को समझा दी है. मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव के एग्जिट पोल के आंकड़े आ गए हैं, जो साफ इशारा कर रहे हैं क‍ि बीजेपी-श‍िंदे गुट का अलायंस जबरदस्‍त जीत दर्ज करने जा रहा है.

सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले Axis My India के एग्‍ज‍िट पोल को देखें तो साफ है क‍ि यूपी-बिहार वालों को बाहरी बताकर न‍िशाना लगाने वाले ठाकरे ब्रदर्स को घर में ही करारी श‍िकस्‍त मिलती दिख रही है.न तो उन्‍हें मराठ‍ियों ने पूरा प्‍यार द‍िया और ना ही बाहरी लोगों का वोट मिला. उत्तर भारतीयों और अन्य राज्यों के मतदाताओं ने एकतरफा होकर बीजेपी के पक्ष में वोटिंग की है.

आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की उत्तर भारतीय व‍िरोध की राजनीत‍ि उन पर भारी पड़ गई है. एग्जिट पोल के मुताबिक 68% उत्तर भारतीयों ने बीजेपी श‍िवसेना (श‍िंदे) की लीडरश‍िप वाले महायुति को वोट दिया है. वहीं उद्धव और राज ठाकरे वाले अलायंस को उत्‍तर भारतीयों के सिर्फ 19% वोट मिले. यह आंकड़ा साफ द‍िखा रहा क‍ि क‍िस तरह उत्‍तर भारतीयों का ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में हो गया. यूपी-बिहार के लोगों ने एकजुट होकर उस पार्टी को चुना जिसने उन्हें सुरक्षा और सम्मान का वादा दिया. ‘गाली’ और ‘बाहरी’ का ठप्पा लगाने की राजनीति ने इस वोट बैंक को पूरी तरह से बीजेपी की गोद में डाल दिया है.

‘मराठी मानुस’ के गढ़ में भी बड़ी सेंधमारी

  1. शिवसेना का जन्‍म ही मराठी मानुस के नाम पर हुआ था, लेकिन एकनाथ शिंदे की बगावत और बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग ने इस किले को भी भेद दिया है. मराठी वोटों में बंटवारा नजर आया.
  2. उद्धव ठाकरे गुट को सिर्फ 49% मराठ‍ियों ने वोट क‍िया. बीजेपी ने भी 30% की बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर ली है. 50% से कम मराठी वोट मिलना ‘मातोश्री’ के लिए चिंता का विषय है.
  3. इसका मतलब है कि मराठी वोटर अब सिर्फ भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि विकास और हिंदुत्व के नाम पर बंट गया है.
  4. बीजेपी और शिंदे गुट मिलकर मराठी वोटों का एक बड़ा हिस्सा (30%) अपने साथ ले जाने में सफल रहे हैं, जो ठाकरे की सबसे बड़ी हार मानी जा सकती है.

दक्षिण भारतीयों का भी बीजेपी पर भरोसा

सिर्फ उत्तर भारतीय ही नहीं, दक्षिण भारतीय समाज ने भी मुंबई के विकास के लिए बीजेपी को अपना किंग चुना है. 61% दक्षिण भारतीय वोटरों ने बीजेपी अलायंस का बटन दबाया, जबकि UBT को सिर्फ 21% वोट मिले.यह द‍िखाता है कि मुंबई का कॉस्मोपॉलिटन यानी महानगरीय वोटर अब क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय पार्टी और विकास के एजेंडे के साथ जाना पसंद कर रहा है.

मुस्लिम वोट क‍िसे मिला

उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की छवि बदलने और सेक्युलर वोटरों को लुभाने की जो कोशिश की, उसका फायदा उन्हें मिला तो, लेकिन वह जीत दिलाने के लिए काफी नहीं दिखता. एग्‍ज‍िट पोल बता रहा क‍ि मुस्लिम वोटों का सबसे बड़ा हिस्सा (41%) कांग्रेस अलायंस के पास गया, उसके बाद उद्धव गुट (28%) को मिला.मुस्लिम वोटों का यह बंटवारा बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है. उद्धव ठाकरे को मुस्लिम वोट मिले जरूर, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपने ‘कोर हिंदुत्ववादी’ मराठी वोटर (जो बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो गया) को खोकर चुकानी पड़ी.

समीकरण की नई तस्वीर

इस एग्जिट पोल का सबसे बड़ा संदेश यह है कि मुंबई अब बाल ठाकरे के दौर वाली मुंबई नहीं रही, जहाँ केवल भावनात्मक मुद्दों पर चुनाव जीते जाते थे. यूपी-बिहार के लोगों को निशाना बनाने की रणनीति पूरी तरह उल्टी पड़ गई. यह वर्ग अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में है और उसने बीजेपी का राज तिलक करने का फैसला किया है. मराठी वोटों का 30% बीजेपी के पास जाना यह बताता है कि ‘ठाकरे ब्रांड’ अब मराठी मानुस का एकमात्र ठेकेदार नहीं रहा. अगर ये एग्जिट पोल नतीजों में बदलते हैं, तो यह मुंबई में एक युग का अंत और बीजेपी के ‘अभद्य दुर्ग’ के उदय की शुरुआत होगी.

NEWS AGENCY INA
Author: NEWS AGENCY INA

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